
नई दिल्ली, 26 मार्च 2025 – भारतीय शेयर बाज़ार में आज वही हुआ जो अक्सर सरकारी वादों के साथ होता है—बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन नतीजा ज़ीरो के आसपास ही निकला। सेंसेक्स 32.80 अंकों की ऐतिहासिक (या कहें हास्यास्पद) बढ़त के साथ 78,017.19 पर बंद हुआ। उधर, रुपये की हालत ऐसी है जैसे बोर्ड परीक्षा में 33% पर अटके छात्र की—गिर भी नहीं रहा, पास भी नहीं हो रहा! और सोने-चांदी के भाव? वो अब केवल रसूखदारों की जेब के लायक रह गए हैं।
सेंसेक्स: ऊंट की करवट या बस टायर में हवा कम?
आज सुबह जैसे ही बाज़ार खुला, निवेशकों की धड़कनें तेज़ हो गईं। लेकिन दिनभर सेंसेक्स की चाल देखकर लोग समझ गए कि यह कोई बैल (Bull Market) नहीं, बल्कि एक ऐसा ऊंट है जिसे चलने की जल्दी बिल्कुल नहीं।
आज के बाज़ार की मुख्य बातें:
✔ सेंसेक्स 32.80 अंक चढ़ा, यानी बाज़ार में उतना ही बदलाव आया जितना सरकारी दफ्तरों में लंच ब्रेक के बाद आता है।
✔ निफ्टी भी थोड़ी बहुत इधर-उधर हिली, लेकिन कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
✔ आईटी और फार्मा शेयरों ने दिखाया दम, शायद इसलिए क्योंकि सबको दवाई की ज़रूरत पड़ने वाली है—रुपये की हालत देखकर!
✔ बैंकिंग और ऑटो सेक्टर सुस्त, क्योंकि कर्ज़दारों को अब EMI भरने के लिए शायद किडनी बेचनी पड़े।
बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि यह “तेजी का संकेत” है, लेकिन छोटे निवेशकों को लग रहा है कि यह वैसे ही झूठी दिलासा है, जैसे किसी टीचर का कहना—”अगली बार अच्छे नंबर आएंगे!”
रुपया: ICU में भर्ती, डॉलर बना डॉक्टर
रुपये की हालत वैसे ही बिगड़ रही है जैसे आलू-प्याज के दाम। आज डॉलर के मुकाबले रुपया ₹85.59 पर आ गया, और ऐसा लग रहा है कि जल्द ही यह ₹90 तक का सफर तय कर लेगा—बिना किसी रोक-टोक के!
आज की विनिमय दरें:
💰 $1 = ₹85.59 (डॉलर का एटीट्यूड देखो, जैसे किसी NRI दूल्हे का!)
💶 €1 = ₹92.51 (यूरो ने भी सोचा, जब रुपया गिर ही रहा है, तो क्यों न हम भी ऐश करें!)
💷 £1 = ₹110.89 (पाउंड ने तो हद ही कर दी, अब विदेश यात्रा तो सपना ही समझो!)
अब जो लोग विदेश में पढ़ाई का सपना देख रहे थे, उन्हें सुझाव है कि वे यूट्यूब पर वीडियो देखकर आत्मनिर्भर बनें। जो लोग विदेश यात्रा का सोच रहे थे, वे अपने मोहल्ले के किसी नई सड़क पर घूमकर ही “ट्रैवलिंग व्लॉग” बना सकते हैं!
सोने-चांदी की चमक, लेकिन केवल अमीरों के लिए
जब तक आप मिडिल क्लास हैं, तब तक सोने-चांदी को केवल न्यूज चैनल के स्क्रॉल में देखिए, क्योंकि इसकी कीमतें अब आपके बजट से बाहर हैं।
आज के रेट:
💛 24K सोना: ₹8,929/ग्राम (अब शादियों में नकली गहनों का ट्रेंड और बढ़ेगा!)
💛 22K सोना: ₹8,185/ग्राम (जो लोग इसे सस्ता समझ रहे हैं, वे खुद को खुश कर सकते हैं!)
🥈 चांदी: ₹1,01,000/किलो, यानी अब यह सिर्फ़ राजाओं के महलों की शोभा बढ़ाएगी।
अगर आपने कभी सोचा था कि “थोड़ी चांदी खरीद लें, फ्यूचर में काम आएगी”, तो अब बस अपनी किस्मत को कोस सकते हैं। चांदी की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि अब लोग स्टील की चीज़ों को ही पॉलिश करके खुश होंगे!
आम आदमी की हालत: न सेंसेक्स समझ आता है, न पेट्रोल के दाम
अब बात करते हैं सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति की—आम आदमी! क्योंकि हर बार की तरह इस बार भी उसे सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है।
महंगाई के सितम:
⛽ पेट्रोल के दाम ₹110/L तक पहुंचने की कगार पर! (अब गाड़ियों की जगह लोग फिर से बैलगाड़ी का ऑप्शन सोच सकते हैं!)
🥦 सब्ज़ी के दाम ऐसे बढ़ रहे हैं कि अब घरवाले “आज लौकी खाएंगे” बोलकर भी गर्व महसूस करने लगे हैं।
🏡 EMI अब इतनी हो चुकी है कि लोग किराया देकर ही खुद को प्रॉपर्टी ओनर समझने लगे हैं!
⚡ बिजली बिल देखकर लोग अब पंखा तक सोच-समझकर चला रहे हैं।
एक आम आदमी ने कहा—
“अब हमारे पास दो ही विकल्प हैं—या तो हम निवेश करना सीख लें, या फिर यह मान लें कि हमारा पैसा अब कभी बढ़ेगा ही नहीं!”
आगे क्या होगा?
अब सवाल यह है कि इस बाजार के नाटक में आगे कौन सा ट्विस्ट आने वाला है?
📉 सेंसेक्स 80,000 के पार जाएगा या फिर नीचे आकर 75,000 छूएगा?
💸 रुपया ₹90/$ तक गिरेगा या चमत्कार होगा और ₹80/$ हो जाएगा?
🪙 सोना ₹10,000/ग्राम होगा या कभी राहत मिलेगी?
💍 चांदी और महंगी होगी या अब सरकार इसके लिए भी कोई नई योजना बनाएगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी, लेकिन यह अस्थिरता कब तक बनी रहेगी, इसका जवाब कोई नहीं जानता।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
जो लोग बाज़ार में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए कुछ सुझाव हैं—
✔ अगर आपकी जेब में पैसा बचा है, तो धैर्य रखिए।
✔ अगर पैसा नहीं बचा है, तो कृपया यूट्यूब पर “पैसा बचाने के तरीके” सर्च कीजिए।
✔ अगर आप पूरी तरह से कंगाल हो चुके हैं, तो फिलहाल न्यूज़ देखकर भी अपना खून मत जलाइए!
(यह लेख व्यंग्यात्मक है, कृपया इसे दिल पर न लें, लेकिन बाज़ार की सच्चाई पर गौर जरूर करें!)
पोपट लाल लेखन की दुनिया के वो शख्स हैं, जो शब्दों को ऐसी कलाबाज़ी खिलाते हैं कि पाठक हंसते-हंसते कुर्सी से गिर जाएं! गंभीर मुद्दों को भी ये इतनी हल्की-फुल्की भाषा में परोसते हैं कि लगता है, जैसे कड़वी दवाई पर चॉकलेट की परत चढ़ा दी गई हो। इनका मकसद बस इतना है—दुनिया चाहे कुछ भी करे, लोग हंसते रहना चाहिए!
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