
“बाजार वही जो नाच नचाए, निवेशक वही जो घाटा खाए!”
27 मार्च 2025 का दिन शेयर बाजार के लिए किसी हॉरर मूवी से कम नहीं था। सेंसेक्स ने 728.69 अंकों की जबरदस्त गोता लगाया और 77,288.50 पर जा गिरा। अब बाजार को समझ नहीं आ रहा कि इससे उठे कैसे? ऐसा लग रहा है जैसे सेंसेक्स ने जिम में वेट लिफ्टिंग करने की कोशिश की और सीधा कमर पकड़कर बैठ गया। दूसरी ओर, डॉलर, यूरो और पाउंड तीनों ही रुपये को धोबीपाट देने में लगे हुए हैं।
आइए, इस पूरे तमाशे को विस्तार से समझते हैं और देखते हैं कि इस गिरावट में कौन ‘कंगाल’ हुआ और कौन ‘मालामाल’!
शेयर बाजार: ‘बाजार का मूड’ इंसान से ज्यादा मूडी!
शेयर बाजार का स्वभाव इंसानों की तरह हो गया है—कभी हंसता है, कभी रोता है, कभी अचानक ऐसा व्यवहार करने लगता है कि निवेशकों को समझ नहीं आता कि इसे मनाने के लिए कौन-सी घुट्टी दी जाए!
सेंसेक्स की दिल दहलाने वाली गिरावट
- सेंसेक्स 728.69 अंक गिरकर 77,288.50 पर पहुंच गया।
- निवेशकों को लगा था कि बाजार चढ़ेगा, लेकिन सेंसेक्स बोला, “अबे! अप्रैल फूल आने वाला है, पहले ही झटका दे देता हूं!”
- कुछ लोगों ने स्टॉक्स में पैसा लगाया, और अब वो स्टॉक्स देख-देखकर सोच रहे हैं, “यही गलती कर बैठा था मैं!”
निवेशक बोले: ‘हम लुट गए, बर्बाद हो गए!’
सुबह-सुबह निवेशक बड़े जोश में अपने ब्रोकरेज ऐप्स खोल रहे थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने सेंसेक्स का हाल देखा, तो कॉफी छोड़कर ठंडे पानी के छींटे मारने लगे।
कुछ बड़े निवेशकों ने इस गिरावट को देख, अपने स्टॉक्स से नजरें फेर लीं, ठीक वैसे ही जैसे कर्ज में डूबा इंसान बैंक वालों को देख कर रास्ता बदल लेता है।
वहीं, छोटे निवेशकों का हाल वैसा ही था जैसा दूल्हे का होता है जब उसे शादी के मंडप में अचानक दहेज की रकम का पता चलता है—पसीने-पसीने!
डॉलर की गुंडागर्दी और रुपये की बेबसी
डॉलर इस समय WWE का चैंपियन बन चुका है और रुपया रो रहा है। विदेशी मुद्राओं ने भारतीय रुपये को ऐसा पटक दिया है कि अब वो उठने का नाम ही नहीं ले रहा।
- $1 = ₹85.66
- €1 = ₹92.52
- £1 = ₹110.57
डॉलर की अकड़
डॉलर ने ऐसा टशन दिखाया है कि रुपये ने भी कह दिया, “भैया, अब तो इज्जत बचाना मुश्किल हो रहा है!”
विदेश यात्रा के सपने देखने वालों की हालत ऐसी हो गई है जैसे किसी ने सपना दिखाकर बीच में ही अलार्म बजा दिया हो। अब वो टिकट की कीमतें देखकर कह रहे हैं—“क्यों ना साइकिल से ही निकल लिया जाए!”
सोने-चांदी का ऐश्वर्यकाल: गरीबों, दूर रहो!
शेयर बाजार में लंका लग रही हो तो कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन सोना-चांदी हर हाल में अपना रॉयल ठाठ दिखाते हैं। इनकी कीमतें इस तरह बढ़ रही हैं जैसे किसी सरकारी अफसर की रिश्वत की दरें!
- 24K सोना: ₹8,955 प्रति ग्राम
- 22K सोना: ₹8,210 प्रति ग्राम
- चांदी: ₹1,02,000 प्रति किलो
सोने ने कहा: “तुम गरीबों के लिए नहीं बने!”
सोने की कीमतें ऐसी चढ़ रही हैं जैसे मोहल्ले के सबसे होशियार बच्चे के नंबर बढ़ते हैं। अब शादियों में दुल्हनों को कहा जा रहा है, “सोने की मांग मत करना बेटा, तुम्हारी किस्मत में आर्टिफिशियल ज्वेलरी ही लिखी है!”
सोना इतना महंगा हो गया है कि अब लोग बैंक लूटने का नहीं, गहनों की दुकान लूटने का प्लान बना रहे हैं!
संपन्न लोग VS गरीब लोग: बाजार में दो तरह के इंसान
बाजार में दो ही तरह के लोग होते हैं—एक वो जो हर गिरावट में “ये अच्छा मौका है!” कहकर स्टॉक्स खरीद लेते हैं, और दूसरे वो जो अपना बटुआ टटोलते हैं और पाते हैं कि “अच्छा मौका था, लेकिन पैसा नहीं है!”
किसका क्या हाल है?
- बड़े निवेशक (अंबानी-अडानी वाले लोग)
- “अरे कोई बात नहीं! अभी गिरा है, कल फिर बढ़ जाएगा!”
- वो अभी भी मल्टीप्लेक्स में फिल्में देख रहे हैं, डिनर पर बढ़िया खाना खा रहे हैं।
- छोटे निवेशक (मध्यम वर्ग के लोग)
- “भाईसाहब, अब तो EMI भी भारी लग रही है!”
- चाय भी कंजूसी से पी रहे हैं, क्योंकि “हर पैसा जरूरी है!”
- बेरोजगार लोग
- “बाजार गिरे या चढ़े, हमें क्या फर्क पड़ता है? हमारे पास तो पहले ही कुछ नहीं था!”
बाजार गिरा तो गिरा, आगे क्या होगा?
अब सवाल ये है कि “बाजार की ये दशा आगे भी रहेगी या कुछ सुधार आएगा?”
- विशेषज्ञों की राय
- कुछ विश्लेषकों का कहना है कि “बाजार उठेगा, लेकिन कब? कोई नहीं जानता!”
- कुछ का मानना है कि “जल्द ही सुधार आएगा, लेकिन हमें खुद नहीं पता कब!”
- निवेशकों की उम्मीदें
- “बस भगवान, अब और गिरावट मत देना, नहीं तो हमारे स्टॉक्स कूड़े के ढेर में मिल जाएंगे!”
निष्कर्ष: बाजार का यही हाल रहेगा!
बाजार का यही हाल रहेगा—कभी ऊपर, कभी नीचे।
- निवेशकों को बस यही सीखना है कि धैर्य रखो और धैर्य रखते-रखते धैर्य खोने से बचो!
- अगर बाजार गिरा, तो मत डरिए, क्योंकि “ये उठेगा भी, पर कब?”—बस यही सबसे बड़ा सवाल है!
अंत में एक मजेदार बात
अगर आप स्टॉक्स खरीदने की सोच रहे हैं, तो एक सलाह—
“भाई, सोच-समझकर लगाना, क्योंकि यह बाजार है, दिल नहीं, जो हर बार धोखा देगा!”
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