
(एक व्यंग्यात्मक पड़ताल: AI का जादू या मार्केटिंग की ठगी?)
आजकल हर चीज़ में AI घुस चुका है। फ्रिज में AI, मोबाइल में AI, टूथब्रश में AI, और तो और, बाल सुखाने वाले ड्रायर में भी AI! कंपनियों ने ऐसा माहौल बना दिया है कि अगर आपके अंडे उबालने वाली मशीन में AI नहीं है, तो आप 18वीं सदी में जी रहे हैं।
लेकिन क्या वाकई इन चीज़ों में कोई असली AI होता है, या यह सिर्फ़ एक मार्केटिंग जुमला बनकर रह गया है? आइए, इस “AI Washing” नामक महान धूर्तता का पोस्टमार्टम करें।
AI Washing: नाम बड़ा, दर्शन खोटा
AI Washing का मतलब है कि कोई कंपनी अपने प्रोडक्ट को स्मार्ट और एडवांस दिखाने के लिए झूठा दावा करे कि उसमें AI तकनीक है, जबकि हकीकत में वह केवल एक मामूली सा एल्गोरिदम होता है।
ठीक वैसे ही जैसे कुछ लोग जिम की एक महीने की मेंबरशिप लेकर खुद को “फिटनेस गुरु” बताने लगते हैं, वैसे ही कंपनियाँ भी अपने नॉर्मल सॉफ्टवेयर में दो-चार कोड जोड़कर उसे “AI-पावर्ड” घोषित कर देती हैं।
“AI Inside” का फर्जीवाड़ा: कहाँ-कहाँ घुसाया जा रहा है AI?
1. AI-पावर्ड टूथब्रश
पहले लोग बिना ब्रश किए भी दाँत चमका लेते थे, लेकिन अब कंपनियाँ कहती हैं कि जब तक आपका टूथब्रश AI-पावर्ड नहीं होगा, तब तक आप सही से ब्रश कर ही नहीं सकते!
AI टूथब्रश दावा करता है कि यह आपकी ब्रशिंग आदतों को ट्रैक करता है, लेकिन असल में बस यह टाइमर लगाकर बताता है कि दो मिनट पूरे हो गए हैं। मतलब, AI का नाम लेकर कंपनियाँ ऐसा बेच रही हैं, जैसे टूथब्रश NASA के स्पेस मिशन से सीधा आपके बाथरूम में आया हो!
2. AI फ्रिज: ठंडा करने में भी दिमाग लगाएगा?
फ्रिज का काम ठंडा करना होता है, लेकिन जब AI फ्रिज आया, तो कंपनियों ने दावा कर दिया कि यह आपकी खाने की आदतें समझता है। असलियत? यह बस एक सस्ता सेंसर होता है जो आपके फ्रिज का तापमान थोड़ा-बहुत एडजस्ट करता है।
मतलब, पहले इंसान अपने खाने-पीने का ध्यान खुद रखता था, अब यह काम भी “AI” करेगा, और आप ₹50,000 का “स्मार्ट फ्रिज” खरीदकर खुश रहिए!
3. AI वैक्यूम क्लीनर: घर साफ करने का बहाना
रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर आते ही कंपनियों ने दावा कर दिया कि इनमें AI है, जो आपके घर के नक्शे को याद रखता है। हकीकत? यह बस दीवारों से टकराकर अपनी दिशा बदलता है।
मतलब, अगर आपका वैक्यूम क्लीनर बार-बार टेबल से टकरा रहा है, तो घबराइए मत—यह AI नहीं, बस एक बेवकूफ मशीन है, जो अपनी ही ज़िंदगी के फैसले लेने में असमर्थ है।
4. AI-पावर्ड शैम्पू?
अब तो AI शैम्पू भी आने लगे हैं! कंपनियाँ कहती हैं कि यह “आपके बालों के DNA को स्कैन करके परफेक्ट नमी देता है।” भैया, यह शैम्पू है या CID का फॉरेंसिक लैब?
AI Washing के महान विशेषज्ञ: टेक कंपनियों की माया
अब बात करते हैं उन कंपनियों की, जो AI Washing की कला में पीएचडी कर चुकी हैं।
- कुछ मोबाइल कंपनियाँ अपने कैमरे में एक मामूली फ़िल्टर लगाकर कहती हैं कि यह “AI कैमरा” है। हकीकत में बस ब्राइटनेस बढ़ जाती है और लोग सोचते हैं कि उनका चेहरा पहले से सुंदर हो गया!
- कुछ कंपनियाँ अपने पुराने सॉफ़्टवेयर को “AI-सपोर्टेड” बताकर बेचती हैं, जबकि उसमें असल में कोई मशीन लर्निंग या AI नहीं होता, बस कोडिंग में थोड़ा सा बदलाव होता है।
मतलब, टेक कंपनियों के लिए AI अब एक झुनझुना बन गया है—जहाँ देखो, वहीं हिला दिया!
ग्राहकों को उल्लू बनाने की वैज्ञानिक विधि
AI Washing करना कोई आम बात नहीं, इसके लिए कंपनियों को गहरी रणनीति बनानी पड़ती है। आइए समझते हैं कि ग्राहक को उल्लू बनाने के लिए क्या-क्या किया जाता है—
- “AI” शब्द हर जगह चिपका दो – अगर आपकी कंपनी का प्रोडक्ट स्मार्टफोन है, तो उसे “AI-इनेबल्ड स्मार्टफोन” बना दो। भले ही सिर्फ एक टाइपिंग ऑटो-सजेशन का फीचर हो, लेकिन AI का ठप्पा ज़रूरी है।
- थोड़ा-बहुत मशीन लर्निंग डाल दो – किसी भी बेसिक सॉफ़्टवेयर में 10-20 लाइन कोडिंग करके उसे “AI-पावर्ड” बता दो।
- बड़े-बड़े दावे करो – बोल दो कि “AI आपकी लाइफ बदल देगा”, और जनता बिना सोचे-समझे प्रोडक्ट खरीद लेगी।
AI और असली इनोवेशन: कैसे पहचानें असली और नकली AI?
अगर आप नहीं चाहते कि कंपनियाँ आपको “AI Washing” के नाम पर मूर्ख बनाएँ, तो इन बातों का ध्यान रखें—
- AI का असली मतलब समझें – AI कोई जादू नहीं, बल्कि एक टेक्नोलॉजी है जो डेटा सीखकर निर्णय लेने में मदद करती है।
- तकनीकी स्पेसिफिकेशन पढ़ें – अगर किसी प्रोडक्ट में AI लिखा है, तो यह जानने की कोशिश करें कि इसमें मशीन लर्निंग का असली इस्तेमाल हो रहा है या सिर्फ नाम का दिखावा है।
- मार्केटिंग की चमक-दमक से बचें – हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती, और हर “AI-पावर्ड” चीज़ असली AI नहीं होती!
निष्कर्ष: AI Washing का खेल जारी रहेगा!
AI Washing का यह तमाशा तब तक चलता रहेगा जब तक कंपनियाँ ग्राहकों को बेवकूफ बना सकती हैं। असली AI के नाम पर नकली AI बेचकर ये कंपनियाँ अरबों कमा रही हैं, और लोग यह सोचकर खुश हैं कि उनका टूथब्रश अब खुद ही दाँत साफ कर देगा!
इसलिए, अगली बार जब कोई कंपनी कहे कि उनका प्रोडक्ट “AI-पावर्ड” है, तो ज़रा गहराई से सोचिए—यह असली AI है या सिर्फ़ मार्केटिंग का जादू?
और अगर कहीं AI-पावर्ड आलू छीलने की मशीन बिकती दिखे, तो समझ जाइए, AI Washing का खेल अपने चरम पर पहुँच चुका है!
पोपट लाल लेखन की दुनिया के वो शख्स हैं, जो शब्दों को ऐसी कलाबाज़ी खिलाते हैं कि पाठक हंसते-हंसते कुर्सी से गिर जाएं! गंभीर मुद्दों को भी ये इतनी हल्की-फुल्की भाषा में परोसते हैं कि लगता है, जैसे कड़वी दवाई पर चॉकलेट की परत चढ़ा दी गई हो। इनका मकसद बस इतना है—दुनिया चाहे कुछ भी करे, लोग हंसते रहना चाहिए!
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