“दिल्ली की जीत या लखनऊ की दानवीरता? आशुतोष शर्मा बने ‘क्रिकेट के करुणानिधि'”

क्रिकेट का महायुद्ध या करुणा का संगम?

पिछली रात, क्रिकेट प्रेमियों ने एक ऐसा मुकाबला देखा, जिसे देखकर रामायण के भक्तों को ‘लंका कांड’, महाभारत प्रेमियों को ‘कुरुक्षेत्र’ और फिल्मी दर्शकों को ‘गदर 2’ याद आ गया।
दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच मुकाबला उतना ही जबरदस्त था, जितना कि यूपी-बिहार की ट्रेन में सीट पर कब्जा करने की जंग।

मैच दिल्ली कैपिटल्स ने 1 विकेट से जीत लिया, लेकिन असली सवाल यह उठा कि यह दिल्ली की जीत थी या लखनऊ की दयालुता? क्या लखनऊ के गेंदबाजों ने वाकई अपनी गेंदबाजी पर ध्यान दिया था, या वे किसी ध्यान, योग और करुणा मार्ग पर निकल चुके थे?

आशुतोष शर्मा की “ब्रह्मास्त्र” पारी

दिल्ली की टीम का हाल मैच के पहले 15 ओवरों तक ऐसा था, जैसे किसी परीक्षा में बिना पढ़े गए छात्र का होता है – “ना सवाल का जवाब पता, ना पास होने की उम्मीद!”
दिल्ली के बल्लेबाज एक-एक कर पवेलियन लौट रहे थे, और डगआउट में बैठे प्लेयर्स भी भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि “हे प्रभु, हमें इस शर्मिंदगी से बचाओ!”

लेकिन तभी मैदान में उतरे आशुतोष शर्मा, जिनका बल्ला आज किसी सरकारी स्कीम की तरह हर किसी को फायदा पहुंचा रहा था।
31 गेंदों में 66 रन ठोकते हुए उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया कि लखनऊ की टीम के फील्डर भी सोचने लगे, “भाई, जब हारना ही था तो होटल में ही सो जाते!”

लखनऊ के गेंदबाज – संघर्ष या समर्पण?

लखनऊ सुपर जायंट्स की गेंदबाजी देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वे किसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट में नहीं, बल्कि “अंतरराष्ट्रीय मैत्री मिशन” में हिस्सा ले रहे हों।
उनकी गेंदें इतनी विनम्रता से बल्लेबाज के पास जा रही थीं कि खुद बैट्समैन भी चौंक रहे थे – “भाई, हमपर इतना भरोसा क्यों?”

आखिरी ओवर में दिल्ली को 9 रन चाहिए थे, लेकिन लखनऊ ने सोचा – “क्यों न यह मैच परोपकार में दे दिया जाए?” और फिर गेंदबाजों ने इतनी उदारता दिखाई कि हर समाजसेवी संस्थान ने उन्हें सम्मानित करने की ठान ली।

कमेंट्री बॉक्स में भूचाल!

कमेंटेटर भी इस मुकाबले को देखकर भावुक हो गए। स्टार स्पोर्ट्स के हिंदी कमेंटेटर ने तो लखनऊ के प्रदर्शन पर संस्कृत में श्लोक ही सुना दिया – “दानं महत्तमं धर्मं, परोपकाराय जीवनम्!”
इधर अंग्रेजी कमेंटेटर भी हैरान थे – “This is not just cricket, this is pure charity!”

सोशल मीडिया पर “मीम-युद्ध”!

मैच के खत्म होते ही ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर मीम्स की बाढ़ आ गई:

  • “लखनऊ की गेंदबाजी से ज्यादा आसानी से तो सरकारी योजनाओं में पैसा निकलता है!”
  • “दिल्ली ने जीता नहीं, लखनऊ ने मैच दान कर दिया!”
  • “लखनऊ के गेंदबाजों का अगला मिशन – गरीबों को खाना खिलाना!”

लखनऊ टीम का आधिकारिक बयान-

मैच के बाद जब लखनऊ सुपर जायंट्स के कोच से पूछा गया कि गेंदबाजों ने इतनी दयालुता क्यों दिखाई, तो उन्होंने कहा –

“हम क्रिकेट में खेल भावना बनाए रखना चाहते हैं। इसलिए हम अपनी गेंदबाजी को और भी विनम्र बनाने की कोशिश करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि अगले मैच में विरोधी टीम को बिना विकेट गंवाए जीतने का मौका दें!”

जीत की पार्टी

दिल्ली की टीम ने जीत के बाद ज़ोरदार जश्न मनाया। लेकिन कप्तान ऋषभ पंत ने भी यह माना –
“जीत तो हमारी हो गई, लेकिन हम भी मानते हैं कि लखनऊ की उदारता के बिना यह मुमकिन नहीं था!”

अब देखना यह है कि क्या लखनऊ अपनी इस करुणा नीति को अगले मैच में भी जारी रखेगा, या फिर गेंदबाजों को याद आएगा कि क्रिकेट में गेंदबाजी भी की जाती है! t

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