जापान में मेगा भूकंप: धरती काँपी, सरकार सोई, जनता सोफे पर चाय पीती रही!
टोक्यो में ‘हलचल’: भूकंप आया, लोगों ने सिर्फ घड़ियों में समय देखा
टोक्यो, जापान: जब दुनिया में कोई 9.2 तीव्रता का भूकंप आता है, तो देशों में हड़कंप मच जाता है। लोग सड़क पर आ जाते हैं, टीवी चैनल्स ब्रेकिंग न्यूज़ के नाम पर चीखने-चिल्लाने लगते हैं, और सोशल मीडिया पर लोग भगवान को याद करने लगते हैं। लेकिन जापान में ऐसा कुछ नहीं हुआ। धरती हिली, लेकिन जापानियों की दिनचर्या नहीं बदली। ऐसा लगा मानो भूकंप ने खुद जापानियों से माफी मांग ली हो कि “माफ कीजिए, क्या मैं आपको थोड़ा असुविधा में डाल सकता हूँ?”
‘बस एक और दिन’—जापानियों की ‘बोरिंग’ प्रतिक्रिया
जब भारत में कोई भूकंप आता है, तो लोग घर से बाहर भागते हैं, मंदिरों में भीड़ बढ़ जाती है, और कुछ लोग अपनी पुरानी प्रेमिकाओं को आखिरी बार कॉल करने का मौका भी नहीं चूकते। लेकिन जापान में यह सब नदारद था। ऑफिस में लोग अपने लैपटॉप से नजरें हटाने को तैयार नहीं थे, स्कूलों में छात्र भूकंप के झटकों को विज्ञान की ‘लाइव प्रैक्टिकल क्लास’ मानकर बैठ गए, और ट्रेन ड्राइवरों ने तय स्टेशन पर पहुँचने के बाद ही ब्रेक लगाना उचित समझा।
अगर भारत में ऐसा भूकंप आया होता, तो न्यूज़ चैनलों पर स्क्रीन लाल हो जाती, एंकर अपने सूट के बटन खोलकर ‘तबाही लाइव’ चिल्लाने लगते, और सबसे जरूरी काम—लोग अपने मोबाइल नेटवर्क की ताकत पर सवाल उठाने लगते।
सरकार की ‘डोंट वरी, बी हैप्पी’ पॉलिसी
जब 9.2 तीव्रता का भूकंप आया, तब जापान सरकार का बयान आया—”घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह एक सामान्य घटना है। कृपया अपने काम पर ध्यान दें।”
अगर भारत में ऐसा बयान आया होता, तो सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खुल जाता। विपक्ष इसे ‘सिस्टम फेलियर’ बताता, टीवी डिबेट्स में ‘क्या सरकार सो रही है?’ का मुद्दा गरमाया जाता, और जनता इस पर बहस करने के बाद यह भूल जाती कि असली मुद्दा भूकंप था।
तकनीक और तंत्र: जापान का ‘भूकंप प्रूफ’ मॉडल
जापान में हर साल सैकड़ों छोटे-बड़े भूकंप आते हैं, लेकिन उनकी तैयारियाँ इतनी जबरदस्त होती हैं कि नुकसान लगभग नगण्य होता है। न बिजली गुल होती है, न पानी की सप्लाई बाधित होती है, और न ही ‘राहत सामग्री’ के नाम पर कोई घोटाला होता है।
दूसरी ओर, अगर दिल्ली या मुंबई में ऐसा हुआ होता, तो स्थिति कुछ ऐसी होती:
- पहला ट्रेंडिंग हैशटैग—#PrayForDelhi
- दूसरा ट्रेंडिंग हैशटैग—#SaveMumbai
- तीसरा ट्रेंडिंग हैशटैग—#कृपया_इंटरनेट_बंद_मत_करो
- सरकारी टोल फ्री नंबर व्यस्त या ‘अभी उपलब्ध नहीं’ बताता।
- मीडिया चैनल्स भूकंप से ज्यादा सेलेब्रिटीज की प्रतिक्रिया दिखाते।
भारतीय vs. जापानी प्रतिक्रिया: कॉमिक तुलना
अगर भूकंप के दौरान जापान में किसी से पूछा जाए—”आप ठीक हैं?” तो जवाब मिलेगा—”हाँ, बस आज की कॉफी थोड़ी ज्यादा हिल गई थी।”
अगर भारत में यही सवाल किया जाए, तो जवाब होगा—”भाई, मैंने तो जीने की सारी उम्मीद छोड़ दी थी। मेरी मम्मी ने मुझे फोन करके 50 बार हनुमान चालीसा पढ़ने को कहा। और ऊपर से, मोबाइल नेटवर्क भी चला गया!”
सीखने की ज़रूरत: हम जापान से क्या सीख सकते हैं?
अगर जापान भूकंप से निपट सकता है, तो हम भी कर सकते हैं—बस हमें अपने घरों को किसी पत्ते की झोंपड़ी की तरह बनाना बंद करना होगा, हर आपदा को राजनीति से जोड़ना छोड़ना होगा, और सबसे जरूरी—इंटरनेट की स्पीड से ज्यादा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना होगा।
तो अगली बार जब धरती हिले, तो घबराइए मत। जापानियों की तरह चाय पीते हुए सोचिए—”चलो, अब भीड़ कम होगी, शायद ट्रैफिक जल्दी क्लियर हो जाए!”
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