बाज़ार का महा-ठगेस्टर: सेंसेक्स की ऊँची कूद, डॉलर की चालाकी, और सोना-चाँदी की ऐंठ!

(विशेष रिपोर्ट | विशेष व्यंग्य | दिनांक – 28 मार्च 2025, शुक्रवार)

मुंबई स्टॉक एक्सचेंज से लाइव:

बाज़ार में आज फिर गज़ब की हलचल रही। सेंसेक्स ऐसा नाचा कि स्ट्रीट डांसर भी शरमा जाए—317.93 अंकों की उछाल के साथ 77,606.43 पर पहुँच गया। निवेशक जो कल तक “भइया, सब डूब रहा है!” चिल्ला रहे थे, आज वही “अरे, बल्ले बल्ले!” कर रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि यह उछाल असली है या फिर वही फ्री में मिलने वाली किटी पार्टी की चाय की तरह बस दिखावा?

डॉलर की गुंडागर्दी: रुपया ICU में भर्ती, हालत गंभीर

सरकार चाहे जितनी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ले कि “रुपया मजबूत हो रहा है,” लेकिन असलियत यह है कि डॉलर ₹85.75 का आँकड़ा पार कर चुका है। रुपया अब उसी हालत में है जैसे परीक्षा में फेल होने वाला स्टूडेंट—”कोई समझ ही नहीं रहा कि क्या गलती हुई!”

यूरो ₹92.50 और पाउंड ₹110.92 पर पहुँच चुका है। अब कोई भारतीय लंदन जाने की सोचे, तो पहले लोन अप्रूव करवाना पड़ेगा। और अगर किसी ने गलती से डॉलर कमाने वाले दोस्त से रुपए में पैसे उधार माँग लिए, तो दोस्त सीधा कहेगा—”भाई, गरीबों को उधार नहीं दिया जाता!”

सरकार की सफाई: “डॉलर बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, चिंता की कोई बात नहीं।” हाँ, बिल्कुल, जैसे ट्रेन छूटने के बाद प्लेटफॉर्म पर दौड़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है—बस फायदा कुछ नहीं होता!

सोना-चाँदी का रौब: अब गहनों की जगह हल्दी-चंदन का ज़माना!

अगर आप यह सोच रहे थे कि “अबकी बार दुल्हन के लिए सोने का सेट खरीद लेंगे,” तो ज़रा अपनी जेब में हाथ डालकर देख लीजिए। अगर बटुआ खुद ही आपकी हथेली छोड़कर भागने लगे, तो समझ जाइए कि सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं।

24 कैरेट सोना: ₹8,999 प्रति ग्राम
22 कैरेट सोना: ₹8,250 प्रति ग्राम

मतलब, अब सोना खरीदना उतना ही मुश्किल हो गया है जितना कि सरकारी नौकरी लगना। हालात ऐसे हैं कि शादी में लड़की के पिता अब लड़के वालों से कह रहे हैं—”गहनों की चिंता मत करो, हम हल्दी-चंदन में ही निपटा लेंगे!”

चाँदी भी कह रही है—”अब मैं गरीबों की चीज़ नहीं रही, मैं भी लग्जरी में आ चुकी हूँ!” ₹1,02,000 प्रति किलोग्राम और ₹102 प्रति ग्राम पर पहुँचकर यह बता रही है कि अब आम आदमी के लिए स्टील के गहने ही आखिरी विकल्प हैं।

शेयर बाजार का ड्रामा: कौन बनेगा करोड़पति और कौन बनेगा कंगाल?

शेयर बाजार अब एक क्रिकेट मैच की तरह हो गया है। जब तक खेल चल रहा होता है, लोग कहते हैं—”वाह, मज़ा आ रहा है!” और जब खेल खत्म होता है, तो आधे निवेशक स्टेडियम छोड़कर भाग जाते हैं।

एक निवेशक ने बताया—
“भाई, कल जिस स्टॉक में पैसा लगाया था, वो सुबह तक इतना गिर गया कि मुझे लगा, शेयर नहीं, मेरा आत्मसम्मान गिर गया!”

दूसरे ने कहा—
“मैंने शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले सोचा था कि मैं अगला वॉरेन बफेट बनूँगा, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि मुझे किराए के पैसे भी निकालने मुश्किल हो रहे हैं!”

शेयर बाजार अब पूरी तरह से “कौन बनेगा करोड़पति” और “कौन बनेगा कंगाल” का लाइव शो बन चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ अमिताभ बच्चन नहीं, बल्कि विदेशी निवेशक सवाल पूछते हैं। और जवाब न देने पर आपका पैसा गायब हो जाता है!

महँगाई की मार: घर चलाएँ या सपना देखें?

अब हम देश की जनता से सवाल पूछना चाहते हैं—”आपके घर में बचत हो रही है या आपके सपनों में महँगाई घुस गई है?”

  • पेट्रोल: इतना महँगा हो चुका है कि अब लोग अपनी बाइक से ज्यादा खुद चलने को तैयार हैं।
  • सब्ज़ियाँ: अब लोग आलू-प्याज को प्यार से देखते हैं, जैसे कोई 90s की हिरोइन को देखता था।
  • दूध: ऐसा लगता है कि अब माँ-बाप बच्चों को दूध की बजाय “पानी में हल्दी मिलाकर पीने का आयुर्वेदिक ज्ञान” देने लगे हैं।

अब हालात ऐसे हैं कि लोग बाज़ार जाते वक्त अपने बटुए से पहले अपने आत्म-सम्मान की सुरक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करने लगे हैं।

निवेश की टिप्स: आप भी बन सकते हैं करोड़पति! (या पूरी तरह से बर्बाद)

  1. शेयर बाजार में निवेश करें, लेकिन पहले अपने बीपी की दवा खरीद लें।
  2. सोना खरीदें, लेकिन पहले बैंक लूटने की योजना बना लें।
  3. रुपया बचाने के लिए विदेशी मुद्रा में निवेश करें, लेकिन पहले सरकारी नियमों को समझने के लिए पीएचडी कर लें।
  4. बिटकॉइन खरीदें, लेकिन अपने घरवालों को यह मत बताइए, वरना वे समझेंगे कि आपने सट्टा खेलना शुरू कर दिया है।

आगे क्या होगा?

आने वाले दिनों में क्या होगा, यह पूछने से पहले हमें खुद से पूछना चाहिए—”क्या हमारे पास पेट्रोल भरवाने के पैसे बचेंगे?”

  • सेंसेक्स फिर से उछलेगा या धड़ाम गिरेगा?
  • डॉलर ₹90 तक जाएगा या सरकार इसे “देशहित में” और महँगा कर देगी?
  • सोना ₹10,000 प्रति ग्राम तक जाएगा या फिर चाँदी की तरह आम आदमी को “छूने तक की इजाज़त” नहीं होगी?

ये सब सवाल अब भगवान भरोसे छोड़ देने चाहिए, क्योंकि आर्थिक हालात अब देश के आम आदमी के वश में नहीं रहे।

अंत में:

अब आम आदमी के पास दो ही विकल्प हैं—

  1. रात को सोने से पहले अपना बैंक बैलेंस चेक करें और रो लें।
  2. रात को सोने से पहले यह सोचें कि शायद कल कोई चमत्कार होगा!

लेकिन अगर आप सही मायने में अमीर बनना चाहते हैं, तो बस एक ही उपाय बचा है—यूपीएससी निकालिए या फिर सीधे देश का प्रधानमंत्री बन जाइए!

(यह लेख पूरी तरह से व्यंग्यात्मक है, कृपया इसे गंभीर आर्थिक सलाह न समझें। हंसिए, सोचिए, और अपने बजट के हिसाब से खर्च करिए!)

 

पोपट लाल लेखन की दुनिया के वो शख्स हैं, जो शब्दों को ऐसी कलाबाज़ी खिलाते हैं कि पाठक हंसते-हंसते कुर्सी से गिर जाएं! गंभीर मुद्दों को भी ये इतनी हल्की-फुल्की भाषा में परोसते हैं कि लगता है, जैसे कड़वी दवाई पर चॉकलेट की परत चढ़ा दी गई हो। इनका मकसद बस इतना है—दुनिया चाहे कुछ भी करे, लोग हंसते रहना चाहिए!

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